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अंहकार का अर्थ | अंहकार क्यों होता है?? अंहकार के लक्षण | Ego hone par kya hota hai??

अंहकार का अर्थ | अंहकार क्यों होता है?? अंहकार के लक्षण | Ego hone par kya hota hai??

नमस्कार दोस्तों मैं शायर राठौड़ स्वागत करता हूँ आपकी चहीती वेबसाइट shayarallinone पर! दोस्तों मैं आपके समय की कद्र करता हूँ! आपके कीमती वक्त से थोड़ा समय निकालकर इस पोस्ट को जरूर पढ़े! मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ आपके अंदर कभी भी अंहकार नहीं आएगा! और जिसमे किसी प्रकार अंहकार है तो वो कभी अंहकार नहीं करेगा! दोस्तों आज का आर्टिकल अंहकार पर है! अंहकार का अर्थ |अंहकार क्यों होता है?? | Ego hone par kya hota hai??

अंहकार का अर्थ

मन का भ्रम है अंहकार जो कभी भी क्षण भर में टूट सकता है! अंहकार व्यक्ति के बुद्धि की पहचान है! जिस पहचान से वो अपनी छवि दुसरो के सामने खराब करता है! अंहकार एक ऐसी भ्राँति है जो इंसान में ऐसा घमंड पैदा करती है! जब व्यक्ति को अंहकार होता है तो उसे होश नहीं रहता की पहले उसकी पहचान क्या थी?? और अब क्या हो गई! मन के इसी भ्रम को अंहकार कहा गया है!

अंहकार के लक्षण

जब व्यक्ति को अंहकार होता है तो वो अपने मन के वश में हो जाता है! जैसा उसका मन करता है वैसा ही वो करने लगता है! जब अंहकार होता है तो व्यक्ति सही गलत की पहचान भूल जाता है! जो भी उसके पास थोड़ा-बहुत होता है उस पर वो घमंड करने लगता है! जब अंहकार जन्म लेता है तो वो अपने से छोटो लोगो की कद्र नहीं करता अपने से बड़ो का आदर नहीं कर पाता! ऐसे व्यक्ति अक्षर अपने आप को खो बैठते है! सही गलत की पहचान किए बिना ही वो दुसरो को गलत साबित करने में लगे रहते है! अंहकार रिश्तो में दूरियाँ बनाता है! अंहकारी लोगो को लगता जो उनके पास है वो किसी के पास नहीं और उसी पर वो घमंड करते है! ऐसे लोग अंत में अकेले पड़ जाते है!

अंहकार क्यों होता है??

मन में किसी प्रकार का भ्रम पैदा हो जाता है तो अंहकार का जन्म होता है! या हम यह कह सकते है जब व्यक्ति अपनी किसी वस्तु विशेष पर घमंड करता है तो वो अंहकारी व्यक्ति बन जाता है! जब कोई व्यक्ति बड़ो का आदर करना छोटो के साथ प्यार का व्यवहार रखना छोड़ देता है तो उस व्यक्ति में अंहकार आ ही जाता है! अंहकारी लोग हर पल जो उनके पास होता है उसी का दुसरो के सामने गुणगान करते रहते है!

अंहकार को कैसे दूर किया जाए?? | Remedies to cure ego

सबसे पहला उपाय व्यक्ति को हमेशा जमीन से जुड़ा रहना चाहिए! चाहे आप कितनी भी बड़ी अपनी पहचान बनालो! कितनी भी शान शोहरत हासिल करलो! हमेशा जमीं से जुड़ा रहना चाहिए! अपने मन और अपनी सोच को अपने वश में रखो! कभी भी इसके दम पर अंहकार रूपी “पर (पंख)” लगाकर आसमान में उड़ने की कोशिश मत करो! ज़िंदगी का पल भर का भरोसा नहीं, जो आया है वो जाएगा!

इसलिए आपके पास अधिक धन दौलत है तो उस पर घमंड नहीं उसका उपयोग करना सीखो! जरुरत मंदो की सहायता करो! कुछ लोग ऐसे होते है जो अंहकार के कारण अंत में डिप्रेशन में चले जाते है! उन्हें यह तक समझ में नहीं आता अब आगे करे तो क्या करें?? अपनी सोच को हमेशा सकारात्मक रखो! postive लोगो के साथ उठना बैठना रखो! जो लोग nagativ सोच विचार रखते है उनसे हमेशा दूरियां बनाकर रखो! ऐसा करने पर कभी भी आपके अंदर अंहकार का जन्म नहीं होगा!

Ego hone par kya hota hai??

जिनको अभी भी किसी बात का अंहकार है तो उनसे मेरा यही कहना है दोस्त अंहकार को छोड़ अंहकार राजा रावण का नहीं रहा तो तुम्हारा क्या रहेगा! जो हुआ उसे भूल, ज़िंदगी को नए सिरे से शुरू करो, जिससे रिश्ते नाते, दोस्ती सब अपने आपके साथ रहे, दूर नहीं! अंहकार का अंत बहुत ही बुरा होता है!

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