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रिश्ता रिश्तेदार और रिश्तेदारी true love and fake love

रिश्ता रिश्तेदार और रिश्तेदारी true love and fake love

रिश्तेदार और रिश्तेदारी आज के आर्टिकल में जानेंगे रिश्तों से जुड़े महत्व को | रिश्ता रिश्तेदार

दोस्तों मैं आपके समय की अहमियत को समझता हूँ! आप यहां तक आये है तो इसे पूरा जरूर पढ़े मैं यकीन के साथ कह सकता हूँ की आपको इससे सिख और समझ मिलेगी! आज का आर्टिकल है रिश्ता रिश्तेदार और रिश्तेदारी true love and fake love.

 

रिश्ता रिश्तेदार और रिश्तेदारी
 

रिश्ता रिश्तेदार

दोस्तों जब सोचने बैठो तो यह सवाल जहन में जरूर आएगा की रिश्ते बनाये किसने? कौन था? पहला मानव जिसका जन्म हुआ! विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की करले लेकिन इस बात का पता नहीं लगा सकता! धर्मों में हिन्दू धर्म के अनुसार संसार की उतप्ति ईश्वर ने की!  पौराणिक कथा में बताया गया की भगवान ब्रह्मा ने २ लोगो को बनाया जिसमे एक स्री और एक पुरुष था! बताया जाता है की ब्रह्मा जी ने पुरुष का नाम मनु और स्त्री का नाम  शतरूपा रखा! फिर उनका वंश इस तरह बढ़ा की पूरी दुनिया का निर्माण हुआ! लोगो ने देश बनाये देश में धर्म बनाये धर्मों से रिश्ते बनाये और उन रिश्तों में रिश्तेदारी बनाई! दोस्तों कुछ महान लोगो ने रिश्ते को दो भागो में बांटा  एक  खून का रिश्ता! दूसरा व्यक्ति अपने व्यक्तित्व से बनाता है जिसको दोस्ती, यारी और इंसानियत का रिश्ता कह सकते है! खून के रिश्ते में माता-पिता भाई-बहिन आते है, इनके अलावा चाचा-चाची नाना-नानी दादा-दादी इस तरह से लोग इनको दूर के रिश्ते पास के रिश्ते इस तरह से नाम देते है!  

 
 

खून का रिश्ता  blood relationship :

दोस्तों खून के रिश्ते जहाँ अपनापन लगे खून के रिश्ते में माँ बाप को सबसे बड़ा दर्जा होता है! ब्रह्मा जी ने तो पहला मानव बनाया जिसको आप जानते तक नहीं ना आपने ब्रह्मा जी को देखा! आपको तो आपके माता पिता ने ही बनाया! आपके लिए तो वो ही ब्रह्मा है वो ही ईश्वर है जो कुछ भी है आपके लिए तो वो ही है! क्योंकि उनके कारण आपका शरीर है आपका वजूद है! इसलिए इस रिश्ते को सर्वोपरि रखो उनकी कद्र करो! ईश्वर भी आपसे तब खुश होगा जब आप अपने पहले भगवान् आपके जन्मदाता माता पिता को खुश रखोगे!

blood relation

इंसानियत का रिश्ता  Human relationship: | रिश्ता रिश्तेदार

आप अपने आप को इंसान समझते है तो आपको इंसानियत का रिश्ता निभाना चाहिए! इंसानियत का रिश्ता वो होता है जहाँ आप अपनी तकलीफ को जिस तरह से महसूस करते हो! अपनी परेशानियों को समझते हो! इसी तरह से इंसान होने के नाते आप दूसरे इंसान की तकलीफ परेशानी को समझते हो! उनकी मदद करते हो वो इंसानियत का रिश्ता कहलाता है! 

दोस्तों रिश्ते सबके बनते है और बनाते है लेकिन रिश्ते कायम उन्ही के रहते है जो रिश्ते दिल से और सच्चे प्यार से निभाए जाते है!

 
रिश्ता रिश्तेदार और रिश्तेदारी

दोस्ती का रिश्ता Friendship relation:

 

कई लोगो का मानना है की कुछ रिश्ते खून के रिश्तों से भी बढ़कर होते है! उनमे से एक है दोस्ती का रिश्ता! वैसे कहने को सभी कहते है की मैं तेरा दोस्त हूँ या तूँ मेरा दोस्त है! दोस्ती की सही पहचान भी तभी होती है जब आपको सच में किसी चीज से तकलीफ हो आपको परेशानी हो!  यह खबर दोस्त को पता हो लेकिन बिना कहे वो आपकी मदद करे! दोस्ती वो है जब दो लोग एक दूसरे को अच्छी तरह से समझ सके! वो नहीं जो आप किसी को बोलो मेरी मदद करो और वो ना कर पाए तो उससे दुरी बनालो! दोस्ती वो है जो सामने वाले की भी मजबूरियों हालातो को समझे! एक सच्चा दोस्त कभी नहीं चाहेगा की उसका दोस्त कभी मुसीबत में हो! so जरुरत के हिसाब दोस्ती मत करो, दोस्ती की परीक्षा लेना नहीं, देना भी सीखो, तब पता चलता है दोस्ती कैसे निभाई जाती है!

 
प्यार का रिश्ता  Love relationship
प्यार का रिश्ता  Love relationship:
 

प्यार का रिश्ता माता-पिता का प्यार! भाई-बहिन का प्यार! दोस्त का प्यार! प्रेमी-प्रेमिका का प्यार! पति-पत्नी का प्यार! हर रिश्ता एक अलग प्यार की पहचान है लेकिन इनमे जो सम्मान बात है वो है यह सभी रिश्ते दिल से निभाए जाते है दिमाग से नहीं! इसी को सच्चा प्यार कहा गया है! 

 
 
रिश्तेदार Relative (रिश्ता रिश्तेदार)

इन रिश्तो से ही रिश्तेदार बनते है! आप भलीभांति जानते है की रिश्तेदार कौन होते है, लेकिन वास्तव में रिश्तेदार कौन होते है वो वक्त बताता है! आपकी परिस्थितियां आपके विपरीत चल रही हो फिर भी आपके साथ हो! सब रिश्ते रश्में दिल से निभाए वो ही सच्चे रिश्तेदार है! लेकिन अधिकत्तर तकलीफें कुछ रिश्तेदार ही देते है! उनको सब पता है आपको तकलीफ किस बात से होती है! वो ऐसे ही काम करते है, जिनसे आपको तकलीफ हो! जब परिस्थितियां आपके विपरीत हो उस समय यह रिश्तेदार आपकी मदद नहीं करते! लेकिन जब आपके पास सबकुछ होगा! आप सफल होंगे तो लोग आपसे दूर का रिश्ता बताके भी रिश्ता निभाने लगेंगे! 

 
रिश्ता रिश्तेदार और रिश्तेदारी
 

रिश्तेदारी Kinship – रिश्ता रिश्तेदार

कहने को एक शब्द है लेकिन यह सिर्फ शब्द नहीं बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है! रिश्तेदार जिसको निभाते है वो ही रिश्तेदारी है! जिसने जैसा निभाया रिश्ते को उसकी रिश्तेदारी भी वैसी है! 

 

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रिश्तों में दरारे तब आती जब लोग रिश्तो को भी दिमाग से निभाने लगते है वर्ना दिल से जुड़े रिश्तों में कभी दूरियाँ नहीं बनती!

रिश्तें अनमोल उनके लिए होते है जो रिश्तों की अहमियत को समझते है उनकी कद्र करते हैं वर्ना कुछ लोग तो ऐसे होते है जो रिश्तों में भी मोल भाव करले!

अपने कीमती समय में से थोड़ा वक्त अपने रिश्तो को भी दें क्योंकि रिश्तो को अगर कुछ देने के लिए है तो वो वक्त से बढ़कर कुछ नहीं!

रिश्तों में थोड़ी अनबन होती है इसका मतलब यह नहीं की रिश्ता कमजोर है रिश्ता तो तब कमजोर है छोटी सी बात पर टूट जाए!

रिश्तो को निभाने के लिए विश्वास का होना जरुरी है बिना विश्वास के कोई भी रिश्ता मजबूत नहीं होता! 

किसी के कहने से अनजान लोगो से ना रिश्ते बनते है ना बिगड़ते रिश्ते तो विश्वास से बनते है और धोखे से टूटते है!

रिश्ता वो है जिसमे अपनापन महसूस हो रिश्ता वहाँ नहीं जहाँ अपनापन नहीं!

रिश्ते बनाना बहुत आसान है लेकिन जितनी आसानी से रिश्ते बनाते हो उतनी आसानी से रिश्ते निभाना भी आना चाहिए! 

 
 
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